बिहार में आटा चक्की बिजनेस का मौका
बिहार के हर गांव और कस्बे में ताजे पिसे आटे की मांग है। पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया जैसे शहरों में पैकेट आटे की बजाय लोग चक्की का ताजा आटा पसंद करते हैं। गेहूं पिसाई ₹3–5 प्रति किलो चलती है — यानी दिन का 200 किलो पीसने पर ₹600–1000 की कमाई।
कौन सी मशीन लें?
शुरुआत के लिए 14 इंच डायमंड स्टोन आटा चक्की सबसे अच्छा विकल्प है — 3–5 HP थ्री फेज मोटर, 20–25 किलो/घंटा आउटपुट। छोटे गांव के लिए 12 इंच (सिंगल फेज) भी चलेगी, जिसमें बिजली का कमर्शियल कनेक्शन भी नहीं चाहिए।
डायमंड स्टोन क्यों जरूरी?
साधारण एमरी पत्थर वाली चक्की में हर हफ्ते टकी (ड्रेसिंग) करानी पड़ती है — बिहार में टकी वाला मिस्त्री ढूंढना और हर बार ₹300–500 खर्च करना बड़ा सिरदर्द है। कापी की डायमंड स्टोन चक्की सालों-साल बिना टकी चलती है।
कुल निवेश और कमाई
- मशीन + मोटर: बजट के अनुसार (WhatsApp पर ताजा रेट पूछें)
- ट्रांसपोर्ट: मुंबई से बिहार 4–7 दिन, लकड़ी की मजबूत पैकिंग
- महीने की कमाई: ₹20,000–35,000 (200–300 किलो/दिन पर, बिजली काटकर)
- मशीन की लागत 4–6 महीने में वसूल
इंस्टॉलेशन की चिंता न करें
मशीन के साथ इंस्टॉलेशन वीडियो आता है और हमारी टीम वीडियो कॉल पर पूरा सेटअप कराती है — बिल्कुल फ्री। बिहार के किसी भी जिले में डिलीवरी उपलब्ध है।
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